न्याय व्यवस्था कैसे त्वरित, सुलभ एवं कम खर्चीली हो | विषय पर विचार गोष्ठी एवं मुरादाबाद के वरिष्ठ स्वयंसेवकों की स्मृति अक्षुण्ण बनाये रखने के लिये प्रकाशित पुस्तिका “रोली-चन्दन” के विमोचन कार्यक्रम के अवसर पर कार्यक्रम सयोंजक श्री गोपाल टंडन जी ने कहा कि न्याय का अर्थ है समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय पहुंचे वह तभी हो सकता है जबकि न्याय व्यवस्था त्वरित, सुलभ एवं कम खर्चीली हो | साथ-साथ न्याय व्यवस्था में समय सीमा भी तय होनी चाहिए | इसके लिये सरकार के साथ-साथ न्यायिक कार्य में लगे अधिकारी, कर्मचारी, वादी, प्रतिवादी, अधिवक्तागण एवं समाज के हर वर्ग को गंभीर होना आवश्यक है |
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि भारत भूषण शील प्रदेश उपाध्यक्ष अधिवक्ता परिषद् ने कहा कानूनी प्रक्रिया प्रक्रियात्मक अधिक एवं तथ्यात्मक कम है | भारतीय दण्ड सहिंता, दण्ड प्रक्रिया सहिंता, व्यवहार प्रक्रिया सहिंता एवं साक्ष्य अधिनियम अंग्रेजों द्वारा बनाये गए थे हमने उन्हें ज्यों का त्यों स्वीकार कर लिया, परिणाम यह हुआ जो प्रक्रिया अपनाई गयी है उसे नहीं बदला जायेगा तो त्वरित न्याय की कल्पना ही असंभव है |
विवेचना की कोई समय सीमा नहीं है ! न्यायलय में वाद की कोई समय सीमा नहीं ! दण्ड प्रक्रिया सहिंता में एक दरोगा को इतनी शक्ति दे दी गयी है कि न्याय की हत्या हो गयी है | अंग्रेजों ने न्यायाधीश बनाये उन्हें मीलॉर्ड कहा जाने लगा, वह अपने को भगवान समझने लगे | एक न्यायधीश पर जितने मुक़दमे होने चाहिए उससे पांच गुना मुकदमे उनकी अदालत में चल रहे हैं इसलिए त्वरित न्याय मिलना संभव नहीं है | रामराज्य का अर्थ विकास नहीं, सस्ता, सुलभ और त्वरित न्याय रामराज्य कहलाता है |
इस अवसर पर वरिष्ठ प्रचारक श्री मनीराम जी (क्षेत्र कार्यकारिणी सदस्य) ने न्यायाधीश के पद की गरिमा और महत्त्व को रेखांकित करते हुए कहा न्यायाधीशों में धैर्य और दया अवश्य होने चाहिए | अपने कार्य के प्रति गंभीरता होनी चहिये | अनेक बार ऐसा देखा गया है कि न्यायाधीश महोदय डायस पर ना बैठकर अपने चैम्बर में बैठ जाते हैं और पेशकर महोदय तारीखें देते रहते हैं जिससे न्याय की गति रुक जाती है |
विभाग प्रचार प्रमुख पवन जैन ने कहा कि मजबूत लोकतंत्र के लिये मजबूत न्याय व्यवस्था आवश्यक है यदि न्याय व्यवस्था ठीक हो जाये तो देश की 60% समस्याओं का समाधान स्वत: हो जायेगा | यदि न्याय समय पर एवं सीमा के अन्दर हो तभी कोई व्यक्ति क़ानून से डरेगा तब स्वत: ही अपराध कम हो जायेंगे | यदि समय सीमा हो जाएगी तो न्याय अपने आप ही सस्ता हो जायेगा, न्याय तो इसलिए भी महंगा है कि वह हर तारीख पर अपना सभी कार्य छोड़कर व्यापार-नौकरी से छुट्टी लेकर न्यायलय आता है वहां पर भी आर्थिक नुकसान होता है | एक विषय पर मैं और ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ कि एक व्यक्ति को लोअर कोर्ट से उम्र कैद कि सजा हो जाती है और हाईकोर्ट से बरी कर दिया जाता है तो ऐसा लगता है कि कोई एक न्यायधीश या तो अक्षम था या फिर कुछ भ्रष्टाचार इसमें शामिल हो गया | जो व्यक्ति पीड़ित है उसका दस-बीस वर्ष का समय खराब हुआ और पैसा गया उसकी भरपाई की व्यवस्था भी होनी चाहिए | सरकारी अस्पताल की तरह सरकारी वकील भी हर व्यक्ति के लिये नि:शुल्क अथवा बहुत कम फीस पर उपलब्ध होने चाहिए |
इस अवसर पर “रोली-चन्दन” पुस्तिका के लेखक डॉ० अजय अनुपम ने बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विकास यात्रा में बहुत सारे नाम, परिवार और व्यक्तियों के समूह सामने आते हैं किन्तु इस पुस्तक में बहुत से लोगों का परिचय हमारी पूरी कोशिश के बाद भी सम्मलित नहीं किया जा सका, ऐसे समस्त कर्मठ राष्ट्रहित के लिये सर्वस्वत्यागी, जीवनदानी और समाज के लिये अपना घर-बार छोड़कर सदा राष्ट्र चिंतन करने वाले स्वयंसेवकों को हम प्रणाम करते हैं और इस पुनीत कार्य में शाखा के मु०शि० रूपचंद्र मित्तल, कार्यवाह टेकचंद जी एडवोकेट, हमारी आंबेडकर शाखा के सभी स्वयंसेवकों के साथ महानगर के अधिकांश वरिष्ठ स्वयंसेवकों का सहयोग मिला |
इस पुस्तिका का विमोचन श्री मनीराम, श्री भारत भूषण शील, ओम प्रकाश शास्त्री, डॉ० विनीत गुप्ता, डॉ० गोपाल टन्डन, श्री कमलकांत राय जी ने संयुक्त रूप से किया |
कार्यक्रम की अध्यक्षता विभाग सहसंघचालक श्री ओम प्रकाश शास्त्री एवं कार्यक्रम का संचालन सुरेन्द्र पाल सिंह एडवोकेट ने किया |
उपस्थिति: सुरेन्द्र पाल सिंह, सुभाष कत्याल, अनिल सिक्का, निर्मल मेहता, विभाग प्रचारक श्री नागेन्द्र कुमार, वरिष्ठ अधिवक्ता चौधरी धर्मवीर सिंह, नीलम वर्मा एडवोकेट, अनीता टंडन एडवोकेट, धवल दीक्षित, गोपाल प्रजापति (बरेली), उम्मेदराज पुरोहित, प्रकाश वैष्णव, शिवकुमार जी, नरेश कुमार, वरिष्ठ अधिवक्ता टेकचन्द जी, रक्षा गोयल, विवेक भटनागर, विकास गोयल, महानगर प्रचारक अतुल कुमार |

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