नई दिल्ली। भारत ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा तरजीही व्यापार (GSP) के दर्जे को भंग करने की इच्छा जाहिर करने के बाद अनसुलझे मुद्दों पर काम करने की मंसा जाहिर की है। मगर, भारत ने “सांस्कृतिक और धार्मिक भावनाओं” का हवाला देते हुए यह भी साफ कर दिया है कि वह अपने उस रुख पर कायम रहेगा, जिसके तहत वह उन जानवरों से मिलने वाले डेयरी प्रोडक्ट को नहीं खरीदेगा, जिन्हें दूसरे जानवरों का खून या मीट खिलाया जाता है।

इस मुद्दे पर समझौता नहीं होना एक प्रमुख कारण है, जिसकी वजह से ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि वह भारत को मिलने वाले GSP दर्जे को खत्म करना चाहते हैं। इस दर्जे की वजह से भारत को 5.6 अरब डॉलर मूल्य के भारतीय निर्यात को अमेरिकी शुल्क मुक्त में प्रवेश करने की अनुमति मिलती है। यानी उस पर भारत को कोई टैक्स नहीं देना होता है।

वाणिज्य मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि भारत ने स्पष्ट किया है कि हमारी प्रमाणिकता आवश्यकता के अनुसार, जिस पशु का डेयरी प्रोडक्ट भारत में अमेरिका भेजना चाहता है, उसे कभी भी ब्लड मील (मांसाहार) नहीं कराया गया हो। हमारी सांस्कृतिक और धार्मिक भावना को देखते हुए यह ऐसा मामला है, जिस पर हम समझौता नहीं कर सकते हैं। इस जरूरत को हटाए बिना यदि डेयरी सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया होती है, तो उस पर विचार किया जा सकता है।

दूध और दूध उत्पादों के आयात के लिए भारतीय मानदंडों के तहत आयातक या निर्माता को यह प्रमाणित करना होता है कि जिन जानवर के डेयरी प्रोडक्ट भेजे जा रहे हैं उसे कभी किसी दूसरे जानवर के आंतरिक अंगों, मांस आदि को कभी नहीं खिलाया गया है।

मवेशियों के लिए ब्लड मील एक उच्च प्रोटीन आहार पूरक है, जिसके लिए बूचड़खानों से मवेशियों या सुअर के रक्त का उपयोग करता है। इसे मारे गए जानवर के रक्त को सुखाकर पाउडर में बदला जाता है। यह अमीनो एसिड की जरूरतों को पूरा करने के लिए डेयरी पशु आहार में मिलाया जाता है।

फीडपीडिया के अनुसार, डेयरी पशु, बीफ मवेशी, भेड़, सुअर, मुर्गी, विभिन्न मछली प्रजातियों और रेशम के कीड़ों के लिए विभिन्न पशु उत्पादन आहार में अन्य प्रोटीन स्रोतों के लिए ब्लड मीट एक संतोषजनक विकल्प है। यह दुनिया भर में उपलब्ध है, लेकिन कुछ देशों में इसकी बिक्री और उपयोग को नियमित किया जाता है।

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