चुनावी साल में सवर्णों को आरक्षण देने का सरकार का फैसला गेमचेंजर होगा!

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बीजेपी का कदम एससी/एसटी पर कानून संशोधन से उपजी सामान्य वर्ग की नाराजगी को दूर करने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है। आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग दशकों पुरानी है। लेकिन केंद्रीय स्तर पर किसी भी सरकार ने अब तक पहले से जारी आरक्षण को छेड़े बिना विचार नहीं किया। इसे मोदी सरकार का एक साहसिक फैसला माना जा सकता है। क्योंकि एससी/एसटी और ओबीसी कोटे से इतर अन्य गरीबों के लिए आरक्षण का इंतजाम करना कोई मामूली कदम नहीं है। कांग्रेस ने इसके समर्थन की बात कहकर अपनी स्थिति साफ कर दी है। इतना तो तय है कि कोई दल विरोध नहीं कर पाएगा पर संविधान संशोधन बिल पारित करने में कोई रोड़े नहीं अटकाएगा

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